#'कवि_कुछ_ऐसा_गीत_लिख_दो’
हो प्रसन्न मन वदन काया,
गीत कवि लिख दीजिए।
सुप्त तन दुखित जन सभी को,
चेतना वर दीजिए।
देश भक्ति से हृदय पूरित,
भ्रमित मन को ज्ञान दो।
हों न भय, मन वीरता का,
राग-रस भर दीजिए।
हो देश प्रथम हर दृष्टि से
राष्ट्र सबसे श्रेष्ठ हो।
दूषित विचार को छाँट कर,
मधुर स्वर लिख दीजिए।
सुखद विचार भू पर पले,
द्वेष वसन उतार दो।
शुद्ध बुद्धि जन मन में भरो,
विमल हृदय कर दीजिए।
जीवन का जिसमें सार हो,
शब्द शक्ति अपार हो।
पीकर अमर बन जायें वो,
अमिय रस भर दीजिए।
-गोदाम्बरी नेगी