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25 May 2025 · 1 min read

कुढते कुढते यह जीवन

कुढते कुढते यह जीवन
ज्वालामुखी बनाओ मत,
तुम भी कुछ हो सकते हो
सत्य अटल, झुठलाओ मत,
पतझड़ है तो होने दो
गीत विरह के गाओ मत,
अपना जीवन जिए बिना
इस संसार से जाओ मत…

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