हे, मेरे प्यारे फूलों
हे, मेरे प्यारे फूलों,
मेरे आँगन में,
रोशन तुम चिरागों,
विस्तृत अम्बर में,
मुस्कराते तुम सितारों,
मुझको तुमसे बहुत उम्मीद है।
मेरी खुशियां,
सिर्फ तुम्ही हो,
मेरे सफर में,
जहाँ साहिल होगा,
वहाँ साकार,
मेरे स्वप्न तुम्ही होंगे,
क्योंकि तुमको मैं,
कल की आवाज मानता हूँ।
बेदाग, निःस्वार्थ, पवित्र हो तुम,
मैं तुम पर,
बहुत गर्व करता हूँ ,
मैं तुमको,
इस वतन का अमन कहता हूँ ,
क्योंकि कल को तुम्ही हो,
इस वतन को,
विश्व वंदनीय जगद्गुरु स्वर्गभूमि बनाने वाले।
तुम्ही से होगा,
इस वतन का नाम महशूर,
मेरी यह जिंदगी,
प्राण तुम्ही से लेती है,
मुझको विश्वास है कि तुम,
वतन और मेरा सिर झुकने नहीं दोगे,
मैं तुमको बहुत प्यार करता हूँ ,
हे, मेरे प्यारे फूलों।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)