दुबराज का भात
दुबराज का भात
बूड़ा खेत की मिट्टी का
विजय-गान है,
अन्नपूर्णा का आशीर्वाद
और महिमा महान है।
इस हेतु मैं
वर्षा का ऋणी हूँ,
सूर्य किरणों का
विनम्र अभारी हूँ।
मैं हर कौर के साथ
ऐसे तृप्त होता रहा
मानो सदियों से भूखा हूँ,
मैं उस भूमि का
पुजारी सरीखा हूँ।
दुबराज का भात
उस धान से बना है,
जो उसी मिट्टी से
पसीने से मिलकर उपजा है।
इसलिए जानता हूँ
उसके दाने-दाने का स्वाद,
वो बूड़ा खेत
और उसकी मेढ़ भी है याद।
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
( साहित्य वाचस्पति )
अमेरिकन एक्सीलेंट अवार्ड प्राप्त
हरफनमौला साहित्य लेखक।