अवधी गीत
हम्मैं काहे बिसार दिहेव दिलजानी
दोसरे क देत हौ उँचका असनवा
अपनेन के खातिर है लाखौ बहनवा
इज़्ज़त माटी किहेव है गई पानी
हम्मैं काहे०—-
दोसरे क धन दौलत सोरहौ सिंगरवा
पानी जे राखै उ बैठइ बहरवा
तोहरे नज़रिया म हम कानी
हम्मैं काहे०——-
एक बेर दैकै तौ देखौ तू मौका
लागी धड़ाधड़ छक्का औ चौका
लागी चमकै चमाचम रजधानी
हम्मैं काहे०—–
खर्चा खुटान कुछ होई न जादा
इज्जत बढ़ै घर कै ई है इरादा
नाही मटिया मिलावउ ज़िंदगानी
हम्मैं काहे०—–
प्रीतम श्रावस्तवी