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25 May 2025 · 1 min read

अवधी गीत

हम्मैं काहे बिसार दिहेव दिलजानी

दोसरे क देत हौ उँचका असनवा
अपनेन के खातिर है लाखौ बहनवा
इज़्ज़त माटी किहेव है गई पानी
हम्मैं काहे०—-

दोसरे क धन दौलत सोरहौ सिंगरवा
पानी जे राखै उ बैठइ बहरवा
तोहरे नज़रिया म हम कानी
हम्मैं काहे०——-

एक बेर दैकै तौ देखौ तू मौका
लागी धड़ाधड़ छक्का औ चौका
लागी चमकै चमाचम रजधानी
हम्मैं काहे०—–

खर्चा खुटान कुछ होई न जादा
इज्जत बढ़ै घर कै ई है इरादा
नाही मटिया मिलावउ ज़िंदगानी
हम्मैं काहे०—–

प्रीतम श्रावस्तवी

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