मैं पीछे रह गयी हूँ साथ चलने के समय के
मैं पीछे रह गयी हूँ साथ चलने के समय के
मुझे भी ये सदी अपनी नजर से देखती है
बुलंदी पर हैं वो,,उनको कहाँ मालूम है
सितारों को जमीं शिद्दत से कितना चाहती है
मैं पीछे रह गयी हूँ साथ चलने के समय के
मुझे भी ये सदी अपनी नजर से देखती है
बुलंदी पर हैं वो,,उनको कहाँ मालूम है
सितारों को जमीं शिद्दत से कितना चाहती है