जिंदगी भर दर्द का ही था सहारा
जिंदगी भर दर्द का ही था सहारा
और दुनिया में भला क्या था हमारा
दे उसे ठुकरा अगर ईश्वर भी दर से
तो भला जाए कहाँ किस्मत का मारा
जिंदगी भर दर्द का ही था सहारा
और दुनिया में भला क्या था हमारा
दे उसे ठुकरा अगर ईश्वर भी दर से
तो भला जाए कहाँ किस्मत का मारा