देते देते हम जवाब थक जाएंगे
देते देते हम जवाब थक जाएंगे
दुश्मन फिर और तैयारी से आएंगे
रक्षात्मक रह कर बहुत झेल चुके
अब आक्रामक बन के भी दिखाएं
अबकी मारा तो हम ऐसा कर देंगे
फिर से यदि मारा तो वैसा कर देंगे
दशकों बीत गये ये करते सहते
उठ न सके भविष्य में ऐसा घात करें
जैसे को तैसा वाला नियम चलाओ
आतंकी, सेना, नागरिक का भेद मिटाओ
इंसानियत उन्हें, जो इसके लायक हों
इस धोखे से अब तो बाहर आओ
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे ना छोड़ें वे
हम क्यों इनकी आड़ में पिटते जाएं
युद्ध में सब जायज़ है उनके लिए
हम क्यों सिद्धांतों का ढोल बजाएं