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24 May 2025 · 1 min read

चुरा कर चाँदनी के साए को

चुरा कर चाँदनी के साए को
हर शाम ढलती रही
प्रेम दिव्य स्वप्न का हृदय से
आलिंगन करती रही

©️ डॉ. शशांक शर्मा “रईस”

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