*जब कोई साथ नहीं आए, मित्र अकेला चल (हिंदी गजल)*
जब कोई साथ नहीं आए, मित्र अकेला चल (हिंदी गजल)
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1)
जब कोई साथ नहीं आए, मित्र अकेला चल
बिना किसी से आस लगाए, मित्र अकेला चल
2)
बहुमत की परवाह नहीं कर, जग को कहने दे
जब सब जग तुझको ठुकराए, मित्र अकेला चल
3)
एक दिवस अफसोस करेंगे, यह हॅंसने वाले
हर कोई जब हॅंसी उड़ाए, मित्र अकेला चल
4)
सदा बदलते हैं कटु मौसम, दिन शुभ आऍंगे
अपने होंगे सभी पराए, मित्र अकेला चल
5)
सही बात को लोग सराहें, यह माहौल नहीं
बिना साथ में दुनिया लाए, मित्र अकेला चल
6)
जो रूठे हैं तुझसे उनसे, प्रीति हमेशा रख
बिना एक क्षण व्यर्थ गॅंवाए, मित्र अकेला चल
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451