दया बाबा
कौन नहीं जानता उन्हें
गाँव में
आन गाँव में
दस कोसी में
बीस कोसी में
बहुत दूर-दूर तक जानते
दया बाबा को
जो मशहूर रहे
वैद्यराज के नाम से।
उमर पचासी में भी
दिखती उनकी मांसपेशियाँ
कसी-कसी
कद पौने छह फुट से ज्यादा
वाणी में गजब की मिठास
हुनर एक से बढ़कर एक।
डॉक्टर द्वारा जवाब दे चुके
मानव और पशुओं को
अपने आयुर्वेदिक ज्ञान से
मौत के मुँह से खींच लाते
पारिश्रमिक- चढ़ावा
कुछ भी नहीं लेते।
न जाने दया बाबा
किस मिट्टी या
किस धातु के बने थे
जो टस से मस न होते थे
अपनी बातों से
नेक इरादों से।
एक सौ दो वर्ष में
सतलोक गमन के बाद भी
दूर-दूर से लोग आते रहे
फिर सच्चाई जानकर
उस घर की दहलीज को
बड़ी श्रद्धापूर्वक नमन कर
लौट कर जाते रहे।
ऐसे महामानव को
हमारा शत शत नमन्…।
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
( साहित्य वाचस्पति )
प्रशासनिक अधिकारी
हरफनमौला साहित्य लेखक।