शाख़ पर अटके रहे कुम्हला गये जो
शाख़ पर अटके रहे कुम्हला गये जो
क्या करूँ उन फूलों का,मुरझा गए जो
क्यों मैं उन रिश्तों की यादों को सँजोऊँ
समय की दहलीज़ पर ठुकरा गए जो
शाख़ पर अटके रहे कुम्हला गये जो
क्या करूँ उन फूलों का,मुरझा गए जो
क्यों मैं उन रिश्तों की यादों को सँजोऊँ
समय की दहलीज़ पर ठुकरा गए जो