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24 May 2025 · 2 min read

#लघुकथा

#लघुकथा
😃 तसला भर तसल्ली।
(प्रणय प्रभात)
“लुप्त समाज” के “सुप्त सदस्यों” के “व्हाट्सअप ग्रुप” पर एक “अनचाही सी पोस्ट” देख कर लाला कपट चंद की खोपड़ी के कपाट खटाक से खुल गए। समाज के अघोषित ठेकेदार के सुबह सवेरे भुन्न होने की वजह बनी पोस्ट एक ऐसे परिवार के सदस्य की उपलब्धि से जुड़ी थी, जिसे महाशय समाज का हिस्सा मानने को राज़ी नहीं थे।
मानसिक एलर्जी के कारण उपजी दिमागी खुजली से खिन्न लाला जी की अक़ल का नाला पल भर में उफान पर आ गया। इससे पहले कि पोस्ट पर किसी की कोई प्रतिक्रिया आती, कपट चंद ने हाथों हाथ समाज के मेधावी बच्चों के सम्मान की एक मनगढ़ंत मांग समूह में परोस दी। मकसद था पिछली पोस्ट को निचली बनाना। जो स्क्रीन से रसातल में चली जाए और किसी को नज़र न आए।
बिना ख़ुजाए भेजे की खुजली मिटाने में लगभग कामयाब लाला जी अपना संदेश भेज कर सुकून से चाय की चुस्की ले रहे थे। तभी मोबाइल में मैसेज आने की सूचना “पीं पीं” की आवाज़ ने दी। व्हाट्सअप खोला तो एक पर्सनल मैसेज सामने था। जिसमें लिखा था कि “श्रीमान! बोर्ड एग्जाम में मात्र तीन चौथाई मार्क्स लाने बालों को 25 हज़ार तो उधार के बूते उदार सरकार ही दे रही है। अपने पास है कोई जुगाड ख़ाली ख़ज़ाने से 31 हज़ार देने का? पंचवर्षीय योजना की तरह छह आठ साल में एक क़लम बांटने की भी मत सोचना भगवन! अब वो भी दस बीस की नहीं, ढाई सौ रुपैया की एक आ रही है बाज़ार में।”
चाय का ज़ायका मानो अचानक से कसैला हो गया था। मुंह में भरा हुआ घूंट न उगलते बन रहा था, न निगलते। भुन्न की जगह सुन्न हो चुकी खोपड़ी में अब खुजली का अहसास तक न था। दिल को “तसला भर तसल्ली” मिली तो बस इस बात की, कि मैसेज भेजने वाले ने मैसेज ग्रुप में भेज कर खुरचन जैसी बची खुची इज़्ज़त का फालूदा नहीं बनाया कम से कम। यह भी कुछ कम नहीं था ताल ठोक ठोक अपना घर किले में बताने वाले नंगे नवाब के लिए।।
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#कथ्य
मेरी लघुकथाएं कभी काल्पनिक नहीं होती। मैं अपने आसपास के किरदार, उनके व्यवहार व मनोवृत्ति को क़रीब से देखता, सोचता और परखता हूं, फिर आपके सामने रखता हूं। ताकि आप को भी पता चले कि आप किस तरह की प्रजाति के जीवों के बीच जी रहे हैं। साथ ही कथा के केंद्रीय पात्र से मिलते जुलते लोगों को भी अपने बारे में कुछ सोचने पर विवश होना पड़ें। रोचकता बढ़ाने व पटाक्षेप करने के लिए कथा का कुछ हिस्सा काल्पनिक होता ही है, मगर किरदार नहीं।
#ज़्यादा_हक़ीक़त_थोड़ा_फ़सना😃
संपादक
न्यूज़&व्यूज
(मध्यप्रदेश)

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