ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर
क्या खूब लिखी शौर्य गाथा, रणभूमि के वीर,
मां बहनों की उजड़ी मांग का बदला लिया भरपूर ।
घर में घुसकर मारा तुमने,
” बदला लिया है उजड़ी मांग सिंदूर ।”
सिंदूर नहीं बस साज था वो,
बलिदान का इक राज था वो।
जिसे सजा कर चली वीर नारियाँ,
दे रहीं थीं अश्रु में जयकारियाँ।
बर्फीली घाटी, वीरानों की छांव,
जहाँ गूँजी थी सिर्फ़ बंदूक की तान।
पर वहां भी उम्मीदों की लौ थी जलती,
हर सैनिक की आँखों में माँ की ममता पलती।
ऑपरेशन सिंदूर, सिर्फ़ मिशन नहीं था,
यह मातृभूमि से रचाया गया रिश्ता था।
हर गोली के पीछे था एक प्रण,
“सर झुके न तिरंगा, चाहे मिट जाए तन।”
ना भूलेगा देश उनका पराक्रम कभी,
ना थमेगा सिंदूरों का संग्राम अभी।
क्योंकि हर दिल में हैं वो अमर निशान,
जो बन गए हैं भारत की शान।
जय हिंद।
मुकेश शर्मा विदिशा