कायर पाकिस्तान
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कायरता का नाम जो पाया, पाकिस्तान कहाय।
पीठ पीछे वार करें, खुद को वीर बताय।।
शांत पहलगाम में फैली, फिर से रक्त की धार।
फिर से माँ की गोद हो गई सूनी, टूटा एक दुलार।।
लिद्दर जैसी निर्मल धारा, हो गई लहू लुहान।
दुश्मन की हर चाल में, दिखता घोर दलाल।।
ना रण में आए सामने, ना साहस की बात।
छिपकर करके वार वो, सामने कभी ना आए।।
भारत माँ के वीर सपूत, हों तुम निश्चल ध्यान।
हर शहादत का लेगें, हम दुश्मन से प्राण।।
सुनो जवानों देश मेरे के, अबकी पाकिस्तान का कर दो काम तमाम।
तब जाकर मृत आत्माओं को, सच्ची श्रद्धांजलि दी जाए ।।
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मुकेश शर्मा विदिशा