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24 May 2025 · 1 min read

प्यासे दिन-रैन

///प्यासे दिन-रैन///

तुझ बिन सूने नैन सजनवा,
तुझ बिन सूने नैन।
तुझ बिन प्यासा दिवस ये सारा,
तुझ बिन प्यासी रैन।।

तुझ बिन प्यासा जीवन झूठा,
तुम बिन मेरा करम है लूटा।
कैसे पाऊं चैन,
सजनवा‌ तुझ बिन सूने नैन।।

मधुर प्रणय की स्मृत बातें,
जग उठते वे दिन और रातें।
कर देती बेचैन,
सजनवा तुझ बिन सूने नैन ।।

मधुर रागिनी मंजुल गाने,
कौन सुनेगा मेरी तानें।
अब खुलते नहीं बैन ,
सजनवा तुझ बिन सूने नैन।।

झूठी दुनिया झूठे बंधन,
उर में उठते ऐसे स्पंदन।
सुनती प्यासी रैन ,
सजनवा तुझ बिन सूने नैन।।

विरह वियोगिनी मैं तेरी,
मैं अनुगामिनी तेरी चेरी।
अब कैसे पाऊं चैन,
सजनवा तुझ बिन सूने नैन।।

प्रेम समंदर उठ झरता है,
उर में ज्वार सदा भरता है।
मैं विरहीन बेचैन,
सजनवा तुझ बिन सूने नैन ।।

झर झर झरती अश्रु धारा,
कैसे पाऊं प्रेम तुम्हारा।
नहीं मिलता अब चैन,
सजनवा तुझ बिन सूने नैन।।

स्वरचित मौलिक रचना
प्रो. रवींद्र सोनवाने ‘रजकण’
बालाघाट (मध्य प्रदेश)

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