यादें
यादें
यादें हैं मन,वृत्ति,चित्त के स्तर पर
जैसे पानी पर उंगलियां फिराओ मिट जायेंगी।
यादें है बुद्धि के स्तर पर
जैसे रेत में उंगलियां फिराओ कुछ देर बाद मिट जायेंगी ।
यादें है आत्मा के स्तर पर
संस्कार,ज्ञान,स्वभाव,
व्यक्तित्व,सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन ये सब खूबियां……
रह जाएंगी पत्थर में लकीर के समान।
अपने अच्छे कर्मों से जो दूसरों पर छाप छोड़े ओ भगवान हैं,
बुरे कर्मों से जो दूसरों पर छाप छोड़े ओ सबके सब शैतान है।
एक अच्छी यादें बनाने के लिए
हर रोज खुद से वादा करें
दूसरों के लिए जिए,सेवा करे।
यह स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
स्वयं के भीतर उतर आए
यादें विस्मृत हो आएंगी
बस एक ही भाव रहेंगी लोकेषणा,लोककल्याणकारी कार्य
यही सही यादें है
जो हर पल स्मरण में रहें।
कविराज
संतोष कुमार मिरी “विद्या वाचस्पति”
रायपुर छत्तीसगढ़