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24 May 2025 · 1 min read

दनादन बरसे बम के गोला

दनादन बरसे बम के गोला

दनादन बरसे बम के गोला
थर – थर कांपे दुश्मन के चोला
क्षण क्षण में चली बंदूक से गोलियां
तबाह हुई दुश्मन ,दुश्मन की घर गलियां।

मै भारत हूं सभी भारतीय मेरे बेटे हैं
दुश्मनों के लिए शेर और चीते हैं।
थल,जल,वायु सभी जगह
मेरे बेटों की पहरेदारी है।
तू दुश्मन जिधर से भी घुसने की कोशिश करेगा
औंधे मुंह गिरेगा।

भारत कभी भी आतंकियों का आतंक माफ नहीं करते
और न सहते
मुंहतोड़ जवाब के साथ दुश्मनों के जड़े नेस्तनाबूद करते हैं।

सुन लो कभी इधर तिरंगा पर बुरी नज़र न डालना
वरना घातक हथियारों से खामियाजा और जन धन की हानि से गुजरना होगा।

मांग की सिंदूर मिटाने वालों
सिंदूर ऑपरेशन ही तुझे मिट्टी में मिलाएगा।

साहित्यकार
कविराज संतोष कुमार मिरी “विद्या वाचस्पति”

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