मातृ दिवस
मातृ दिवस
माँ से ममता मिली
करुणा का फूल खिली
मां है जिंदादिली
छत्रछाया सबको मिले।
दुलार और
संस्कार मां की
प्रथम पाठशाला है
जीवन की
मां की आंचल है सुकून की।
मां की सिखलाई
बहुत काम आई
रोज स्कूल भेज
मंद मंद मुसकाई।
वाह मां! मेरे लिए भगवान बनकर आई
आपके सिखलाई बहुत काम आई।
वाकई बहुत काम आई।
रचनाकार
कविराज संतोष कुमार मिरी “विद्या वाचस्पति”
नवा रायपुर छत्तीसगढ़