सुकून
सुकून
हर मुल्क चाहता है सुख
नहीं चाहता है कोई दुख
समृद्धि से सुख की धार
चहूं और फैला व्यापार
जहां निर्भयता का स्थान है
वहीं शांति, सुकून है।
सुख शांति में एकसूत्रता है।
वहीं संतोष का आविर्भाव हैं।
संतोष वहां जहां सुख शांति प्रबल हो
शुद्ध भाव उच्चतम हो
आनंद की बौछार की आग़ाज़ निरंतर हो।
सुख,शांति,संतोष,आनंद की महिमा
भारत देश को प्राप्त है।
सदियों पुरानी मानवीय शोध
आज भारत देश की परंपरा है।
इस देश की सौंधी मिट्टी की खुशबू में
संत,महापुरुषों की रंगत है
देश के वीर सेनाओं की संगत है
सच्चिदानंद से आच्छादित देश है।
साहित्यकार
कविराज संतोष कुमार मिरी” विद्या वाचस्पति”
नवा रायपुर