श्री गणेश वंदना रचनाकार अरविंदभारद्वाज
सबसे पहले प्रथम पूज्य को, करते है प्रणाम
मस्तक चरणों में रखकर हम, शुरू करे कुछ काम
उस बिन पूरे काम न होते, पूरी न होती पूजा
लाल बाग के राजा तुम सा, नहीं कोई है दूजा
विघ्नहर्ता तू कहलाता है, गणेश है तेरा नाम
मस्तक चरणों में रखकर हम, शुरू करे कुछ काम
दुष्टो का संहार करे तू, कष्टों से है बचाता
मनोकामना पूरी करे तू, शरण तेरी जो आता
सारे मनोरथ पूरे होते, आए जो तेरे धाम
मस्तक चरणों में रखकर हम, शुरू करे कुछ काम
जिसने पुकारा कष्ट में तुमको, उसको पार लगाए
भक्त तेरे हम आस लगाकर, द्वार तेरे है आए
लड्डुओं का तुझे भोग लगाए, भक्त सुबह और शाम
मस्तक चरणों में रखकर हम, शुरू करे कुछ काम
अरविंद भारद्वाज