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23 May 2025 · 1 min read

बुजुर्गों की दुआ

रखी है ओढ़नी सिर पर बुजुर्गों ने दुआओं की।
हमें छू भी सकें आकर, न हिम्मत है बलाओं की।
हमारी ज़िन्दगी में ये खड़े रहते हैं बरगद से,
न चिंता मेघ की हमको न ही तपती हवाओं की।।

डॉ अर्चना गुप्ता
22-05-2022

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