बुजुर्गों की दुआ
रखी है ओढ़नी सिर पर बुजुर्गों ने दुआओं की।
हमें छू भी सकें आकर, न हिम्मत है बलाओं की।
हमारी ज़िन्दगी में ये खड़े रहते हैं बरगद से,
न चिंता मेघ की हमको न ही तपती हवाओं की।।
डॉ अर्चना गुप्ता
22-05-2022
रखी है ओढ़नी सिर पर बुजुर्गों ने दुआओं की।
हमें छू भी सकें आकर, न हिम्मत है बलाओं की।
हमारी ज़िन्दगी में ये खड़े रहते हैं बरगद से,
न चिंता मेघ की हमको न ही तपती हवाओं की।।
डॉ अर्चना गुप्ता
22-05-2022