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23 May 2025 · 1 min read

अपनी पहचान मै इन पकिंतयो में सुनाती हूँ

अपनी पहचान मै इन पकिंतयो में सुनाती हूँ

धूप से तपे हुए शौर्य की सौंधी खुशबू,
ग्वाल-बालों की टेर, मुरली की मधुर धुन,
और द्वारका के वैभव की छाया लिए,
मैं उस कुल की संतान हूँ,
जहाँ यशोदा के आँचल में मुरलीधर खेले,
जहाँ सुदर्शन चक्र न्याय का प्रतीक बना।
वो कुल, जो धर्म की रक्षा के लिए रण में हँसकर उतरा —
हाँ, “कुल श्रेष्ठ यादवकुल की मैं जियाई हूँ

Kavi ~ YADAVI
~Isha Singh yaduvanshi

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