रातें रोई हैं मेरी, अब हंसने की बारी है
रातें रोई हैं मेरी, अब हंसने की बारी है
मरते रहें है हमेशा हम, अब जीने की बारी है ।
—— प्रणव राज
रातें रोई हैं मेरी, अब हंसने की बारी है
मरते रहें है हमेशा हम, अब जीने की बारी है ।
—— प्रणव राज