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23 May 2025 · 1 min read

*मिलने रोगी से गए, शुभचिंतक जब चार (हास्य कुंडलिया)*

मिलने रोगी से गए, शुभचिंतक जब चार (हास्य कुंडलिया)
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मिलने रोगी से गए, शुभचिंतक जब चार
घर वालों ने तब किया, आवभगत सत्कार
आवभगत सत्कार, बिठाकर चाय पिलाई
रोगी की फिर शक्ल, कक्ष में जा दिखलाई
कहते रवि कविराय, कहा रोगी के दिल ने
कृपा करें श्रीमान, न आऍं हमसे मिलने
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615 451

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