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22 May 2025 · 1 min read

जैव-विविधता - मनहरण घनाक्षरी

जैव-विविधता दिवस – मनहरण घनाक्षरी

भिन्न-भिन्न जीव जहाँ,
बसती समृद्धि वहाँ,
दुनिया में मिले सदा, जीव की विविधता।
जीव-जंतु या मानव,
कोई लघु या दानव,
पेड़-पौधे संग सदा, रहे समरसता।
रक्षित करें विकास,
करिए कहीं निवास,
भूतल, जल, आकाश, रखिए सजगता।
पोषण करे प्रकृति,
अन्वेषण की संस्कृति,
विनाश लाती विकृति, बने न विवशता।

रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978

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