चाय का प्याला - मनहरण घनाक्षरी
चाय का प्याला – मनहरण घनाक्षरी
बातें कही अनकही,
होती गलत या सही,
मीठी खुशबू आ रही, लिए चाय का प्याला।
कुछ चर्चा कर जाएं,
अतिथि जो घर आएं,
चाय उनको पिलाएं, चुस्की को लेनेवाला।
प्रातः नींद से जगाती,
शाम थकान मिटाती,
ईष्ट मित्र को बुलाती, चाय है प्रेम वाला।
इसके रूप अनेक,
मौका मिले जब एक,
रखकर दिल नेक, पिला देती है खाला।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश पालीगंज पटना।
संपर्क – 9835232978