आज के दोर मे भाई से भाई लड़ने लगे है,
आज के दोर मे भाई से भाई लड़ने लगे है,
घाट पर चिता की लकड़ी भी घीनने लगे है।
और फिर क्या अब, बात कुछ यु बड़ गयी,
जो साथ खाये वह, निवाले भी घीनने लगे है।।
माँ को मुखा अग्नि देने में, वह पीछे खड़े थे,
चांदी के कड़े तो सोने की चूड़ियों पर अडे है।।,
अनिल चौबीसा
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