*सम सामयिक*
#अजब_प्रदेश
#गज़ब_प्रदेश
ज़िले का मृत्यु प्रमाणपत्र सुशासन के दावों के मुंह पर करारा तमाचा।
नीचे दिख रहा यह मृत्यु प्रमाणपत्र किसी एक इंसान नहीं, पूरे ज़िले का है। जो तहसीलदार भिंड के हस्ताक्षर से इसी माह के पहले सप्ताह में जारी होना सुर्खी में है। यह एक कागज़ काफी है प्रदेश की मदमस्त व निरंकुश नौकरशाही तथा भ्रष्ट व लापरवाह बाबूशाही की जुगलबंदी की पोल खोलने के लिए। यह प्रमाणपत्र साबित करता है कि इस प्रदेश में चंद रुपयों के लिए एक आदमी नहीं, पूरे ज़िले को मुर्दा या जिंदा घोषित कर देना एक अदने कर्मचारी व निचले पायदान के अधिकारी के लिए बाएं हाथ का खेल है। लगता है कि यह खेल किसी ने भ्रष्टाचार के खेल की एक मिसाल पेश करने के लिए खेला और सुशासन के थोथे ब खोखले दावों का खेला कर दिया। ऐसे में नाम, उम्र, जाति, आय, अनुभव, पात्रता के जाली प्रमाणपत्र बनवा कर अड़ोस पड़ोस के लोग प्रदेश व जिले में एक अदद सरकारी नौकरी व मनमानी जगह पदस्थी पा जाएं, तो ताज्जुब कैसा। सरकारी पदों पर बैठे अधिकारी व उनके सिर पर कमाऊ पूत की तरह सवार मुंहलगे व सिरचढ़े बाबू बैठे भी शायद उस चंदा उगाही और वसूली के लिए हैं, जिसका तय हिस्सा नीचे से ऊपर तक रेवड़ी नहीं गजक की तरह बंटना आम बात है। मिलीभगत सत्ता व संगठन के अलमबरदारो की न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। यह नेतृत्व विकास अभियान ही तो है, जो एक “छुटभैये” को “भाई साहब” बना कर फर्श से अर्श पर पहुंचा देता है। मिसाल देने की कोई जरूरत नहीं। आप अपने आसपास देख लें। तमाम मिल जाएंगे, जिनके आज दिमाग नहीं मिल रहे हैं किसी से। शर्मनाक हाल आम जनता के लिए ही आपदा नहीं, उस तंत्र के लिए भी एक चुनौती है, जिसे सरकार कहा जाता है।
#प्रणय_प्रभात