विश्वगुरू कौन
महाशक्ति /विश्वगुरू /वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुसार भारतवर्ष कहाँ खडा है : – –
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महाशक्ति नाम आते ही,
शब्द विश्व के ताकतवर देशों की ओर ध्यान खिंचे चले जाता है,
हम भारतीय,
कहाँ खडे हैं,
भारत जैसा – धार्मिक पाखंडी देश,
खोज पाना मुश्किल है,
विश्व में ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला देश,
विश्व-गुरू भारत,
फाइव ट्रिलियन,
विश्व की पांचवीं अर्थव्यवस्था,
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दुहाई हम धर्म की देते हैं,
बात विचार की आती है,
बातें इतिहास को परोसने लगते हैं,
दायें बाएं झांकने लगते हैं,
धर्म की श्रेष्ठता, के नाम पर,
जन्म आधारित भेद,
वर्णाश्रम एक अकाटय चक्रव्यूह,,
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सृष्टि के रचयिता – शिव (सृष्टिकर्ता, कल्याणकारी, युग प्रवर्तक) हमारे पास में
ब्रह्मा (जनक)
विष्णु (पालक)
महादेव /महेश /शंकर ( बुराई के विध्वंसक) हमारे पास है,
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फिर भी यह देश महाशक्ति क्यों नहीं है,
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विचारों का अभाव,
ज्ञान विज्ञान की उपेक्षा,
भौतिकता पर अनदेखी,
प्रकृति की उपेक्षा,
धन संपदा का असमान बंटवारा,
मध्यकालीन भारत में संपदा से वंचित और दमित स्त्री वा शूद्र वर्ण,
रोंगटे खड़े कर देने उदाहरण – आज भी ऐतिहासिक साहित्य – जिसका धरातल,
आज भी आधुनिक भारत में परिदृश्यों में नजर आता है,,
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आज भी अगर भारतीय संविधान की उपेक्षा होती है,
धर्मनिरपेक्ष भारत की परिकल्पना को तोड़ दिया जाता है,,
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भारत एक गरीब देश होगा,
विकसित भारत की बात तो स्वपनिल होगी,
विकासशील देशों की सूची से बाहर आ जायेगा,
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आज वर्तमान दौर के धतरे देख,,
महाशक्ति – चाहे कोई भी रहे,
भारत की अनदेखी नहीं कर सकता,
यह व्यवासायिक उद्देश्य के लिए – सबसे श्रेष्ठ स्थान है,
जिस देश पर अपनी कुल जीडीपी से कहीं अधिक कर्ज है,,,
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भारतीय नागरिक,
खुशहाली में विश्व में कहीं आखरी पायदानों पर है,
भूखमरी, बेरोजगारी, समूह में हमला जिसे भीड़ द्वारा हमले की वारदातों का बढ़ना,
असुरक्षा का भाव,
बिखरी हुई – विदेश नीति.
इस देश का …. रखवाला.
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जिस देश की जनसंख्या में ही ताकत हो.
एकता के अभाव में,
अनेकता में एकता के अभाव में…
कभी भाषा तो कभी – धार्मिक आस्था,
जिस देश में अशांति का कारक बनते हों
– जिस देश की जनता, अपने अतीत की कमजोरियों को ढाल बना कर, जाति, वर्ण, धर्म के आधार पर श्रेष्ठता तय करते हों,,
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आप ही – लेखक, कवि, साहित्यिक मंच पर विद्यमान बौद्धिक जमात,
इन कारकों से परिचित नहीं है,,
तो अपने भविष्य का आकलन करना कोई जटिल काम नहीं है,
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महेन्द्र सिंह भारतीय