तुम नहीं मेरी
तुम नहीं मेरी
ये बेशक मैं जानता हूँ ये
मगर तुम से मोहब्बत है तो है
कब कहा मैंने…
तुम मिल जाओ मुझ को
हो कर किसी ग़ैर की भी
ग़ैर ना हो जाओ
बस इतनी सी हसरत ही तो है
हिमांशु Kulshrestha
तुम नहीं मेरी
ये बेशक मैं जानता हूँ ये
मगर तुम से मोहब्बत है तो है
कब कहा मैंने…
तुम मिल जाओ मुझ को
हो कर किसी ग़ैर की भी
ग़ैर ना हो जाओ
बस इतनी सी हसरत ही तो है
हिमांशु Kulshrestha