प्रस्तावना
डॉ. अली सीना ईरान में पैदा हुए और उनके कुछ रिश्तेदारों का संबंध ईरान में इस्लामी विप्लव के जनक अयातुल्ला खोमैनी के परिवार से था। अधिकांश शिक्षित ईरानियों की तरह वह भी मानते थे कि इस्लाम मानवतावादी मजहब है, जो मानव अधिकारों का सम्मान करता है। लेकिन डॉ. सीना का स्वभाव बचपन से ही अन्वेष्णात्मक, जिज्ञासु, तर्क करने वाला, निडर होकर प्रश्न पूछने वाला और तथ्यों को भेदभावरहित होकर देखने वाला रहा है। धीरे-धीरे जब उन्होंने सच्चा इस्लाम जाना तो वे नैतिक और बौद्धिक रूप से हिल गए। सितम्बर, 2011 से बहुत पहले ही उन्हें यह अहसास हो गया था कि जब तक इस धर्म विशेष में पैदा हुआ व्यक्ति अपने धर्म की खामियों और रहस्यों से पर्दा उठाने की कोशिश नहीं करेगा, दुनिया को उस धर्म के ठेकेदारों द्वारा गढ़ी कहानियों पर ही भरोसा करना पड़ेगा। यह न केवल पाश्चात्य जगत के लिए, बल्कि पूरी सभ्यता के लिए विनाशकारी स्थिति पैदा कर देगा।
जिस क्षण डॉ. सीना को अपने धर्म की अमानवीय प्रकृति का पता चला, उसी समय उन्होंने अपना जीवन अपनी व्यापक चर्चित वेबसाइट ‘फेथ फ्रीडम इंटनरेशनल’ पर इस्लाम के अवांछनीय पक्षों के पर्दाफाश, चर्चा और आलोचना के लिए समर्पित कर दिया।
विश्व डॉ. सीना जैसे मुर्तदों (इस्लाम छोड़ने वाले साहसी व्यक्तियों) के कार्यों से उसी तरह फायदा ले सकता है, जैसा कि उसने वामपंथ के खिलाफ पूर्व वामपंथियों से लिया था।
जैसा कि मैंने ‘लीविंग इस्लाम’ में लिखा था कि इस्लाम और वामपंथ में तमाम समानताएं देखी जा सकती हैं। जैसा कि मैक्सिम रोडिंसन और बरट्रैंड रसेल ने 1930 के वामपंथ और 21वीं सदी के 1990 के इस्लामवादियों की मानसिकता का उल्लेख किया है। रसेल ने कहा था, ‘धर्मों में बोलशेविज्म अर्थात वामपंथ को मुहम्मदवाद के साथ गिना जाना चाहिए, न कि ईसाई धर्म या बौद्ध धर्म के साथ।’ ईसाइयत और बौद्ध प्राथमिक तौर पर व्यक्तिगत धर्म हैं, जो रहस्यमयी सिद्धांतों और चिंतन-मनन पर आधारित हैं। मुहम्मदवाद और बोलशेविकवाद (वामपंथ) समूहवादी, अध्यात्म से दूर और पूरी दुनिया में साम्राज्य स्थापित करने की मंशा रखने वाले हैं। इसलिए पश्चिमी जगत में मुहम्मदवाद और 1930 के वामपंथ के बीच समानताओं को जानने में रुचि बढ़ी।
कोस्लर ने कहा था, ‘तुम चाहे हमारे खुलासे से नफरत करो और अपना पूर्व सहयोगी मानकर हम पर लानत भेजो, पर सच यही है कि हम पूर्व-वामपंथी ही ऐसे हैं जो तुम्हारी सारी अच्छी-बुरी हकीकत को जानते हैं।’ जैसा कि क्रॉसमैन अपने परिचय में लिखते हैं, ‘सिलोन (एक पूर्व वामपंथी) ने मजाक में टॉगलियत्ती (Togliatti) से कहा कि अंतिम युद्ध वामपंथियों और पूर्ववामपंथियों के बीच लड़ा जाएगा। लेकिन जब तक कोई वामपंथ को एक दर्शन मानकर और वामपंथियों को राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी मानकर इनसे दो-दो हाथ नहीं करेगा, तब तक वह पश्चिमी लोकतंत्र के मूल्य को सही तरीके से नहीं समझ पाएगा। शैतान स्वर्ग में रहता था, पर जिसने उसको नहीं देखा था, वह सामने आने पर देवदूत को नहीं पहचान पाएगा, क्योंकि उसे शैतान और देवदूत में फर्क ही नहीं पता।
वामपंथ पराजित हो चुका है, कम से कम आज तो वामपंथ पराजित अवस्था में ही है, लेकिन इस्लामवाद नहीं। अंतिम युद्ध संभवतः पश्चिमी लोकतंत्र और इस्लाम के बीच ही होगा। और इस युद्ध में पश्चिमी लोकतंत्र की तरफ से कोस्लर की आवाज बुलंद करने के लिए ये पूर्व मुस्लिम होंगे, जो इस्लाम की गंदी हकीकत बखूबी जानते हैं। तब हम इन पूर्व मुस्लिमों द्वारा सच के पक्ष में उठाए जा रहे सवालों को सुनेंगे।
स्वतंत्र पश्चिमी दुनिया में रहने वाले हम जैसे लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, वैज्ञानिक सोच रखते हैं और हमें इस्लाम पर तार्किक दृष्टि और कुरान की आलोचना को प्रोत्साहित करना चाहिए। कुरान की तार्किक आलोचना ही अपने पवित्र धर्मग्रंथ को अधिक तार्किक और वस्तुनिष्ठ तरीके से देखने तथा कुरआन की असहिष्णु आयतों के जरिए धर्मांध बन रहे युवाओं को रोकने में मुसलमानों की मदद कर सकती है।
मुसलमान युवाओं को इस्लाम की सच्चाई बताना पश्चिम में रह रहे प्रत्येक व्यक्ति का नागरिक कर्तव्य है। इस्लाम को जानने के लिए मेगास्टोर में उपलब्ध किताबें पढ़ेंगे तो इस्लाम का असली चेहरा नहीं देख पाएंगे, क्योंकि इन किताबों में इस्लाम का बचाव करते हुए इसकी झूठी तस्वीर पेश की गई है। इसके लिए हमें डॉ. सीना की वेबसाइट को खंगालना होगा, जहां डॉ. सीना और उनकी विद्वान लेखकों की टीम ने इस्लाम पर बारीक अध्ययन करने के बाद प्रमाणिक दस्तावेजों और लाजवाब तर्कों के साथ इस्लाम को नंगा किया है। तब जाकर हम इस्लाम की हकीकत को ठीक से जान पाएंगे। अब मैं यकीनन उन सभी लोगों से अली सीना की इस पुस्तक को ध्यान से पढ़ने का आह्वान करूंगा, जिनकी बुद्धि षडयंत्रकारी नारे “इस्लाम शांति का धर्म है” को सुन-सुनकर कुंद व संभ्रमित नहीं हुई है। डॉ. सीना जैसे स्वतंत्र विचारकों के साहसिक प्रयासों की बदौलत अब आपके सपनों और आपके अपनों को नष्ट करने की ओर तेजी से बढ़ रहे मजहब की हकीकत नहीं मालूम होने का बहाना नहीं चलेगा।
इब्ने-वर्राक़ ‘लीविंग इस्लाम, व्हाट द कुरान रियली सेज, द क्वेस्ट फॉर द हिस्टारिकल मुहम्मद, द ओरिजिन आफ कुरान एंड व्हाई आइ एम नॉट ए मुस्लिम’ नामक पुस्तकों के लेखक हैं। इस पुस्तक ने बहुत से मुसलमान युवाओं को जागने और अपने मजहब पर तार्किक सवाल उठाने की प्रेरणा दी है।
[ बुक नेम अंडरस्टैंडिंग मुहम्मद ]
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