# पहलगाम के बोल-----
# पहलगाम के बोल—–
माथे पर बिंदी,
हाथों में चुड़ियाँ,
भिख मांगती रहीं वह,
“छोड़ दो हमारी बिंदियाँ ।”
रोती रहीं, चिल्लातीं रहीं,
तोड़ ली अपनी चुड़ियाँ,
तुमने न सुनी उनकी एक,
बरसा दी अपनी गोलियाँ ।
तुम क्या जानो उनके मन की,
जिन्होंने अपने खोए हैं,
किसी का बाप, किसी का भाई,
सब आँसु बहाए रोए है।
—- प्रणव राज