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21 May 2025 · 1 min read

# पहलगाम के बोल-----

# पहलगाम के बोल—–
माथे पर बिंदी,
हाथों में चुड़ियाँ,
भिख मांगती रहीं वह,
“छोड़ दो हमारी बिंदियाँ ।”

रोती रहीं, चिल्लातीं रहीं,
तोड़ ली अपनी चुड़ियाँ,
तुमने न सुनी उनकी एक,
बरसा दी अपनी गोलियाँ ।

तुम क्या जानो उनके मन की,
जिन्होंने अपने खोए हैं,
किसी का बाप, किसी का भाई,
सब आँसु बहाए रोए है।

—- प्रणव राज

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