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21 May 2025 · 1 min read

चिंतन

चिंतन
स्वार्थ की दुनिया मतलब के मेले
माया का बंधन झूँठे सब झमेले
शिकायत नही पर मन भर गया है
हल्का जर्क दे आगोश में ले ले
©®दुष्यन्त ‘बाबा’

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