किरगा
ये तो नया शब्द सा लगता
पर है पुरानी चीज,
किसान कहे राजमिस्त्री से
किरगा बनाना खचिद।
किरगा यानी अनाज कोठी
जो बड़े घरों की है शान,
कई मन अनाज उदर में छुपाए
सम्पन्न घरों की पहचान।
चाहे कहीं से कोई पहुना आए
रिश्ता लेकर आए मेहमान,
कुछ कहने की जरूरत ना पड़े
है जो समृद्धि की पहचान।
किरगा रखता अनाज छुपाकर
देखने में थोड़ा लगता,
मगर कई मन उलीच कर भी
उसमें और बचा रहता।
अब बड़े किसानों के घरों से भी
सारे किरगा विलुप्त हो रहे,
सभी अनाज बोरे में भरा कर
लाइन से छल्ली लग रहे।
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
( साहित्य वाचस्पति )
प्रशासनिक अधिकारी
हरफनमौला साहित्य लेखक।