तुझपे यह गीत गजल
तुझपे यह गीत गजल, लिखते हैं कैसे हम।
वजह आज इसकी तुम्हें, बता देते हैं हम।।
तुझपे यह गीत ग़जल,———————।।
सूरत हरपल तुम्हारी, रहती है आँखों में।
बना रखी है मूरत भी, तुम्हारी हमने।।
निहारा करते हैं उसको, प्यार से हरदम।
तुझपे यह गीत ग़जल,——————–।।
जितना है प्यार चमन में, गुलशन को महक से।
दीवाना है माहताब जितना, सूरज की चमक से।।
इनसे भी ज्यादा तुमको, करते हैं प्यार हम।
तुझपे यह गीत ग़जल,——————।।
क्योंकि तुमको हमने, माना है मंजिल अपनी।
क्योंकि तुमको हमने, माना है खुशी अपनी।।
तुम्हारे सिवा और को, सच नहीं चाहते हम।
तुझपे यह गीत ग़जल,———————।।
कर लिया हमने इरादा, पाना है सिर्फ़ तुमको।
लिख दी अपनी वसीयत, देने को सिर्फ तुमको।।
ख्वाबों में तुमसे ऐसी ही, करते हैं बातें हम।
तुझपे यह गीत ग़जल,——————।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)