हिंदी दोहे बिषय-गांठ
हिंदी दोहे -गाँठ
#राना मन की गाँठ का,मिटता नहीं निशान।
जिंदा रहती है सदा,चुप रखती पहचान।।
गाँठ नहीं खुद खोलना,यह मन का दस्तूर।
आसपास #राना दिखें,उसको बहुत फितूर।।
मानव मन में बाँधता,गाँठ बहुत मजबूत।
#राना कभी न खोलता,अंदर भय का भूत।।
कौन गाँठ कैसी लगे,रचे समय का चक्र।
#राना मुश्किल खोलना,गति भी होती वक्र।।
गाँठ न ज्ञानी पालते,रखे हृदय को साफ।
करें प्रेम से बात भी,त्रुटियाँ करते माफ।।
*** दिनांक -20.5.2025
✍️ राजीव नामदेव”राना लिधौरी”
संपादक “आकांक्षा” पत्रिका
संपादक-‘अनुश्रुति’त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
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