क्या है छुट्टी की परिभाषा?
क्या है छुट्टी की परिभाषा?
दो पल का सुकून या
जीवन की नई आशा और प्रत्याशा !
क्या है छुट्टी की परिभाषा?
छुट्टी किसी काम से ?
या बिखरे मन के विश्राम से?
छुट्टी पुरानी विचारधाराओं से ?
या अनचाही जिम्मेदारियों से ?
मन को हर वक्त हम,
क्यों देते हैं दिलासा?
क्या है छुट्टी की परिभाषा?
क्या चाहिए छुट्टी रात के अंधेरों से?
क्या चाहिए छुट्टी दिन की रोशनी से?
या तुम तंग हो जीवन की गतिविधियों से?
कभी पूछा है यह सवाल खुद से?
क्यों व्यथित है मन तेरा,
अपनी ही दिनचर्या से ?
अंधेरी रात में ऊर्जा एकत्रित होती है,
सुबह की पहली किरण के साथ वह,
सर्वत्र कण-कण में वितरित होती है।
प्रत्येक कार्य क्रमानुसार चलते हैं,
क्यों नहीं वह एक पल भी ठहरते हैं?
प्रकृति को नहीं होती छुट्टी की चिंता !
तुम भी तो हो उसी का एक हिस्सा,
यह प्रश्न है तुम्हारे विचाराधीन !
किस छुट्टी के तुम हो अधीन?
आराम महज है एक छलावा,
छुट्टी मानसिक भ्रम है या दिखावा,
क्या है छुट्टी की परिभाषा?
यदि छुट्टी ले जाए तुम्हें,
सृजनात्मक दिशा में,
नूतनता को गढ़ पाने में।
यदि तुम हो उसी में व्यस्त,
ऐसी छुट्टी के ही तुम हो अभ्यस्त!
तब तुम जी रहे हो जीवन,
अन्यथा बोझिल है तुम्हारा प्रत्येक क्षण !
छुट्टी का अर्थ निर्माण से है।
उसमें निहित परिणाम से है।
निर्माण कार्य से क्यों चाहिए मुक्ति?
क्यों चाहिए तुम्हें छुट्टी?
यदि चाहिए तुम्हें हरवक्त आराम,
नरम बिस्तर का क्षणिक सुख !
तो जी नहीं रहे तुम,
एक – एक पल काट रहे हो,
मृत्यु की ओर बढ़ रहे हो !
क्या ऐसी छुट्टी की तुम्हें है अभिलाषा?
क्या है छुट्टी की परिभाषा?
आवश्यकता है तुम्हे छुट्टी की,
ठहर कर दो पल सोचने की,
क्या खोया, क्या पाया,
इसकी सटीक गणना की।
किंतु जो खोया उसके लिए, व्यथित न होकर,
जो पाया उसमें खुश रहने की,
नित नूतन छंद गढ़ने की।
अव्यवस्थित मन को, व्यवस्थित करने की
तभी बनेगी छुट्टी की उचित परिभाषा!
अन्यथा कोरी है तुम्हारी हर एक प्रत्याशा !
(यह कविता मेरे उन मित्रों को समर्पित, जो प्रत्येक क्षण आराम पाने को ललायित रहते है🙏)