भारत की बेटियाँ
देन ईश्वर की अनमोल है ये,
इनसे खुशियाँ सुहानी मिलेगी।
बेटियाँ वेद की हैं ऋचाएँ,
सभ्यता की निशानी बनेगी।।
जीते जी कोई तन छू न पाया।
शत्रु झाँसी में घुसने न पाया।
दोनों हाथों में लेकर खड्ग को,
कोई झाँसी की रानी बनेगी।
जो नमक का है कर्ज़ चुकाती।
अपने चन्दन का शीश कटाती।
अपने लख्ते जिगर को लुटाकर,
पन्ना धाय सी बलिदानी बनेगी।
रचनाकार-
राज कुमार शर्मा (प्र०अ०)
क्षेत्र- मऊ, जनपद- चित्रकूट