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19 May 2025 · 1 min read

हंसी छीन लेता है गम कोई

हंसी छीन लेता है गम कोई
ढाता रहा है सितम कोई

मैं की भावना से भरें सब
नहीं कहता हैं हम कोई

हुए जा रहे मतलबी लोग
नहीं रखता है भरम कोई

बदजुबानी सुनकर यारों
रखता है आंखें नम कोई

मैं बड़ा हूं मैं बड़ा हूं यारों
कहां किसी से कम कोई

समय के फेर में एक सा
नहीं रहता हरदम कोई

रूह जब निकलने लगे
पीला दे आबे ज़मज़म कोई

जाति पाति के नाम पर
नहीं पालो वहम कोई।

नूर फातिमा खातून नूरी
जिला -कुशीनगर

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