हंसी छीन लेता है गम कोई
हंसी छीन लेता है गम कोई
ढाता रहा है सितम कोई
मैं की भावना से भरें सब
नहीं कहता हैं हम कोई
हुए जा रहे मतलबी लोग
नहीं रखता है भरम कोई
बदजुबानी सुनकर यारों
रखता है आंखें नम कोई
मैं बड़ा हूं मैं बड़ा हूं यारों
कहां किसी से कम कोई
समय के फेर में एक सा
नहीं रहता हरदम कोई
रूह जब निकलने लगे
पीला दे आबे ज़मज़म कोई
जाति पाति के नाम पर
नहीं पालो वहम कोई।
नूर फातिमा खातून नूरी
जिला -कुशीनगर