रात्रि के अंतिम पहर तक ना रुके
रात्रि के अंतिम पहर तक ना रुके
स्वप्नवत थी,कर मुझे जड़वत गये
सोच कर ही नयन मेरे क्रुद्ध थे
सामने देखा खड़े तो बुद्ध थे
रात्रि के अंतिम पहर तक ना रुके
स्वप्नवत थी,कर मुझे जड़वत गये
सोच कर ही नयन मेरे क्रुद्ध थे
सामने देखा खड़े तो बुद्ध थे