सूरत उसकी देखकर हम मंज़िल का रास्ता को भूल गए।
सूरत उसकी देखकर हम मंज़िल का रास्ता को भूल गए।
हुए बावरे ऐसे की नाराज़ हैं हम,ये मन को बताना भूल गए।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
सूरत उसकी देखकर हम मंज़िल का रास्ता को भूल गए।
हुए बावरे ऐसे की नाराज़ हैं हम,ये मन को बताना भूल गए।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”