नवनिधि क्षणिकाएँ---
नवनिधि क्षणिकाएँ—
19/05/2025
मैं अपनी हद में हूँ
सारी भावुकता छोड़
उचित है, मर्यादा में रहो।
मैं खिलौना नहीं हूँ
जिसे खरीद सको
मैं बिकता नहीं।
तुझमें और मुझमें
बहुत अंतर है मित्र
तू सुबह मैं दोपहर।
जो चाहते हो सुख मिले
इससे बेहतर है मित्र
मेरा साथ ही छोड़ दो।
मैं जानता हूँ सत्य
षड्यंत्रकारी दिमाग में
खिचड़ी पक रही है।
रोज कहते हो मुझसे
अच्छा लिखा करो
अब तक क्या यही सीखा है।
अमृत तुम्हारा है
मुझे ये पता है
तुम जीते रहो
दुख भोगने के लिए।
— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य, (बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)
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