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18 May 2025 · 1 min read

जख्म

नये शहर में ज़ख्म नये मिले है मुझको,
चाहत को परवाने लेकर घूम रहे है !
शख्स! मेरी हिफाज़त जो करता था कोई,
मुझको तोड़ने की कोशिश में जुझ रहा है !
और उसको लगता है कि मुझको पता नहीं है,
अरे, वही तो मेरा था, जिससे तू अभी मिला है !!

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