जख्म
नये शहर में ज़ख्म नये मिले है मुझको,
चाहत को परवाने लेकर घूम रहे है !
शख्स! मेरी हिफाज़त जो करता था कोई,
मुझको तोड़ने की कोशिश में जुझ रहा है !
और उसको लगता है कि मुझको पता नहीं है,
अरे, वही तो मेरा था, जिससे तू अभी मिला है !!
नये शहर में ज़ख्म नये मिले है मुझको,
चाहत को परवाने लेकर घूम रहे है !
शख्स! मेरी हिफाज़त जो करता था कोई,
मुझको तोड़ने की कोशिश में जुझ रहा है !
और उसको लगता है कि मुझको पता नहीं है,
अरे, वही तो मेरा था, जिससे तू अभी मिला है !!