*नहर का पानी, मन के विचार.....*
मैं अपने रिश्तेदार के गाँव गया था। सुबह होते ही हम नहाने के लिए निकले। गाँव में नदी तो नहीं थी, लेकिन नहर थी, और पूरा गाँव वहीं नहाता था। मेरे लिए यह अच्छा अवसर था नहर में नहाने का। घर में एक टब पानी से नहाने वाला व्यक्ति आज बहते पानी में था। लहरों की तरह ही मेरा मन भी उमंग से भर गया।
अक्सर सुना जाता है कि नहर और नदी का पानी बहुत साफ होता है। यही सोच मेरे मन में भी थी। लेकिन जब मैं नहाने पहुँचा, तो देखा कि पानी में कचरा भी बह रहा था—घास, तिनके, पत्तियाँ, चप्पलें, पूजा सामग्री, और कई अन्य चीजें। यह देखकर मैं ठिठक गया और किनारे बैठ गया, सोचते हुए कि जब पानी साफ होगा, तब नहाऊँगा।
गाँव के लोग आते रहे, नहाते रहे, लेकिन मैं वहीं बैठा रहा। मेरे रिश्तेदार ने कहा, “जाओ, नहा लो।” मैंने जवाब दिया, “पानी में कचरा है, थोड़ा साफ हो जाए, फिर नहाऊँगा।” उन्होंने हँसते हुए कहा, “अगर साफ होने का इंतजार करोगे, तो कभी नहा नहीं पाओगे। पानी का कचरा सिर्फ ऊपर बहता है, अंदर से पानी बिल्कुल साफ है।”
मैंने हिम्मत जुटाई और पानी में उतर गया। शुरुआत में मैं कचरे को हटाने की कोशिश करता रहा, लेकिन जितना निकालता, उतना ही नया कचरा आता। मेरे साथी ने कहा, “कचरा हटाने में वक्त मत गँवाओ, डूब जाओ—नीचे का पानी बिल्कुल साफ है।” जब मैंने खुद को पानी में डुबोया, तो सच में महसूस हुआ कि नीचे का पानी बिल्कुल स्वच्छ है।
बाद में मुझे एहसास हुआ कि यह अनुभव हमारे विचारों से जुड़ा हुआ है। हमारे मन में भी अच्छे और बुरे विचार लगातार बहते रहते हैं। कई बार नकारात्मक विचार हमें रोकते हैं, जिससे हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने से हिचकिचाते हैं।
लेकिन अगर हम सतही विचारों को किनारे कर दें और गहराई में जाएँ, तो हमें अपने भीतर की असली स्पष्टता और सकारात्मकता दिखाई देती है।
हमारे विचार स्थिर नहीं हैं, वे प्रवाहित होते रहते हैं—अच्छे भी आएँगे, बुरे भी। हमें बस अभ्यास करना है, कर्म करना है, और खुद को सकारात्मक विचारों में डुबोना है। धीरे-धीरे हमारे भीतर साफ़ सोच और स्वच्छ दृष्टिकोण का प्रवाह बढ़ता जाएगा।
लिखेश्वर साहू
ग्राम सौंगा , पोस्ट-गिरौद
तह-मगरलोड,जिला-धमतरी (छग)
9669874209