मेरा लक्ष्य
सोचा है अध्यापक बनकर, बालक खूब पढ़ाऊँगा
नैतिकता और मानवता की,उनको सीख सिखाऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
नवसृजन की बातें उनको, रोज-रोज बतलाऊँगा
कलम थमा कर हाथ में उनको,सुंदर लेख सिखाऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
जीवन मूल्यों की महत्ता, हर दिन उन्हें सिखाऊँगा
पुलकित जीवन हो उनका, सीख वहीं सिखलाऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
नई चेतना नई उमंगे, गीत तरन्नुम गाऊँगा
भाईचारा हो आपस में, पाठ यहीं सिखलाऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
सम्मान करेंगे मात-पिता का,आदर भाव सिखाऊँगा
रिश्तों की महत्ता को समझें,गुण उनको सिखलाऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
संस्कार गुरुओं से सीखें, ऐसी अलख जगाऊँगा
एकलव्य जीवन में बनना, उनको यही सिखाऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
सबसे प्यारा अपना तिरंगा, उनके हाथ थमाऊँगा
हिंद से प्यारा नहीं है कुछ भी,उनको यही बताऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
जय हिंद नारे की महता, उनको सदा सिखाऊँगा
वीरों के बलिदान के किस्से उनको रोज सुनाऊँगा
सोचा है अध्यापक बनकर , बालक खूब पढ़ाऊँगा
अरविंद भारद्वाज