तेरी गद्दारी को मै वफ़ा से तोलता हु।
तेरी गद्दारी को मै वफ़ा से तोलता हु।
जब घुटन हद तक बढ़ जाती है ,फिर मै बोलता हु।
तेरे बहुत से राज मै जानता हु
बात जब हद तक बढ़ ना जाए
मै अक्सर कम ही बोलता हु ।
तेरी गद्दारी को मै वफ़ा से तोलता हु।
जब घुटन हद तक बढ़ जाती है ,फिर मै बोलता हु।
तेरे बहुत से राज मै जानता हु
बात जब हद तक बढ़ ना जाए
मै अक्सर कम ही बोलता हु ।