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18 May 2025 · 1 min read

*जाते गलियॉं छोड़कर, पीड़ा लिए अपार (कुंडलिया)*

जाते गलियॉं छोड़कर, पीड़ा लिए अपार (कुंडलिया)
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जाते गलियॉं छोड़कर, पीड़ा लिए अपार
मजबूरी केवल यही, आती यहॉं न कार
आती यहॉं न कार, नया घर किसको भाया
जब पाया एकांत, याद गुजरा क्षण आया
कहते रवि कविराय, पड़ोसी भूल न पाते
शहर पुराना छोड़, रो रहे जाते-जाते
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

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