Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
17 May 2025 · 1 min read

बात निकली तो, वहीं बातों का अफ़साना बना

गज़ल
1,,,
बात निकली तो वहीं , बातों का अफसाना बना,
मैं भी दीवानी बनी जब, तो वो दीवाना बना ।
2,,,
डूब जाने को उसे , साग़र-ओ -मीना भी मिले,
ये ज़माने की खता है, जो ये मयखाना बना ।
3,,,
इश्क़ में उसने भुलाएं है सभी आठों पहर ,
खो गया यारों , कहाँ जा के वो परवाना बना ।
4,,,
नींद आँखों में बसी जब , रौशनी आने लगी ,
मुझ से नादानी हुई क्यूँ , जो वो हरजाना बना ।
5,,,
प्यास शिद्दत से उठी ,दर पे कहीं पानी नहीं,
बारहा डूबी जो धड़कन , तो वो पैमाना बना ।
6,,,
‘नील’ समझी थी मुहब्बत, को इनायत भी यहाँ ,
रुख हवाओं का जो पलटा, तो वो बे-गाना बना ।

✍नील रूहानी,, 15/05/23,,,
( नीलोफ़र खान )

Loading...