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17 May 2025 · 1 min read

एक स्त्री

एक स्त्री कितना सहती
इसका है क्या भान तुम्हें
सारा घर है वह सहेजती
क्या इसका है मान तुम्हें
सुबह सवेरे सबसे पहले
उठाना उसकी मजबूरी
नहीं उठेगी तो कैसे चलेगा
वहीं पूरे घर की है धुरी
पूरे दिन करती है परिश्रम
नहीं कभी है वह थकती
यदि कभी थक जाए भी
कह किसी से नहीं सकती
सब की सेवा वह करती है
फिर भी नहीं मेवा मिलती
थोड़ा उसका सम्मान करो
यही सभी से है विनती

मौलिक रचना

पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश

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